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हाईकोर्ट ने खुद पर लगाया 1 लाख जुर्माना

गलत फैसले पर पहली बार हाईकोर्ट ने खुद पर लगाया 1 लाख जुर्माना 

 : कलकत्ता हाईकोर्ट ने रेलवे मजिस्ट्रेट को जबरन रिटायर करने का अपना ही फैसला रद्द किया 

ट्रेनों में देरी सुधारने पर मजिस्ट्रेट को जबरन रिटायर किया था 
पवन कुमार | नई दिल्ली 
न्यायपालिका के इतिहास में पहली बार कोर्ट ने खुद पर ही एक लाख रुपए का जुर्माना लगाया है। मामला कलकत्ता हाईकोर्ट का है। जस्टिस संजीब बनर्जी और सुर्वा घोष की बेंच ने अनुशासनहीनता के आरोप में 6 साल पहले जबरन रिटायर किए गए रेलवे मजिस्ट्रेट मिंटू मलिक को राहत देते हुए उन्हें नौकरी पर फिर से बहाल करने के आदेश जारी किए हैं। दरअसल, रेलवे मजिस्ट्रेट ने ट्रेनों की देरी को रोकने के लिए ड्राइवर और गार्ड से जवाब तलब किया था। जस्टिस बनर्जी ने गुरुवार को फैसला सुनाते हुए टिप्पणी की- ‘अक्सर लोग जब सामने गलत कार्य या कोई अपराध हो रहा होता है, तो अपना मुंह फेर लेते हैं। वे पुलिस की जांच और कोर्ट-कचहरी के चक्कर से बचना चाहते हैं। ऐसे में एक रेलवे मजिस्ट्रेट ने ट्रेनों की देरी को सुधारने के लिए कदम उठाया, तो उन्हें जबरन रिटायर कर दिया गया। यह बहुत बड़ी सजा है और यह वाकया हैरान करने वाला है। ऐसे में हाईकोर्ट प्रशासन का यह आदेश हम रद्द कर रहे हैं।’ हाईकोर्ट ने कार्रवाई से लेकर अब तक की सैलरी की 75% राशि और पदोन्नति समेत अन्य सभी लाभ उन्हें देने काे कहा है। जुर्माने की राशि भी उन्हें ही दी जाएगी। कलकत्ता हाईकोर्ट ने रेलवे मजिस्ट्रेट के खिलाफ अनुशासनात्मक कमेटी की रिपोर्ट पर उन्हें जबरिया सेवानिवृत्ति दे दी थी। हाईकोर्ट प्रशासन के अनुसार रेलवे मजिस्ट्रेट ने अपने क्षेत्राधिकार से बाहर जाकर काम किया। इस आदेश को मजिस्ट्रेट ने हाईकोर्ट की दो सदस्यीय बेंच के समक्ष चुनौती दी थी। हाईकोर्ट ने कहा कि मामले में खुद कमेटी की प्रारंभिक रिपोर्ट मानती है कि मजिस्ट्रेट ने जो किया, उसके पीछे किसी भी प्रकार की कोई दुर्भावना नहीं थी। फिर भी उक्त रिपोर्ट के आधार पर उन्हें जो सजा दी गई, वह चौंकाने वाली है। 

ड्राइवर और गार्ड रास्ते में ट्रेन रोकते थे, दोनों से जवाब मांगा गया था 

मजिस्ट्रेट मलिक 5 मई 2007 को बज-बज सियालदह लोकल ट्रेन का इंतजार कर रहे थे। ट्रेन रोज की तरह पंद्रह मिनट की देरी से आई। उन्हें किसी से सूचना मिली कि रास्ते में ट्रेन को रोका जाता है, ताकि डुप्लीकेट खाद्य पदार्थ ट्रेन में सप्लाई किए जा सकें। मामले की सच्चाई जानने के लिए उन्होंने ट्रेन ड्राइवर और उसके गार्ड को रेलवे कोर्ट के समक्ष जवाब दायर करने को कहा। यहां से मामला कोर्ट पहुंचा था। 


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